पंजाबराज्य

Partition Remembrance: श्री अकाल तख्त साहिब पर विभाजन के शहीदों को याद कर की गई अरदास

अमृतसर.

1947 में विभाजन के दौरान मारे गए समूचे पंजाबियों की याद में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से श्री अकाल तख्त साहिब में अरदास समारोह आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में संगत ने इसमें हिस्सा लिया।

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने 1947 की विभाजन त्रासदी को याद करते हुए कहा कि उस समय 10 लाख से अधिक पंजाबियों की हत्या हुई थी। आज की अरदास का उद्देश्य शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देना और ऐसी त्रासदी दोबारा कभी न होने की प्रार्थना करना है। जत्थेदार ने कहा कि 1947 में सिखों से कई ऐतिहासिक गुरुधाम भी बिछड़ गए और लोगों को अपने घर तथा जमीनें छोड़नी पड़ीं। सिख आज भी बिछड़े गुरुधामों के खुले दर्शन की कामना करते हैं। उन्होंने भारत और पाकिस्तान सरकारों से श्री करतारपुर साहिब कारिडोर को सिख भावनाओं के अनुरूप जल्द खोलने की अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सरकारों को सिख जत्थों के लिए श्रद्धालुओं का कोटा बढ़ाने पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।

ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने सजा पूरी कर चुके बंदी सिंहों की रिहाई और उनसे जुड़े मामलों के समाधान की मांग भी उठाई। उन्होंने भाई बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने और भाई जगतार सिंह हवारा की उनकी बुजुर्ग व बीमार माता से मुलाकात का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सिखों के मामलों में सरकारों द्वारा कथित तौर पर दोहरी नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सिखों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब कौम और गुरु साहिब से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं तो सभी को एकजुट होना चाहिए। गुरुद्वारा साहिबानों में हो रहे हमलों को गलत बताते हुए उन्होंने सिख समुदाय से आपसी टकराव से बचने और श्री अकाल तख्त साहिब की रहनुमाई में मिलजुलकर चलने की अपील की।

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